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हाँ, चैत्यवंदन करने पर कोई लिंग-भेद नहीं है। विधि में महिलाओं के लिए पुरुषों से अलग कुछ सूत्रों का उल्लेख है, लेकिन अनुष्ठान करना दोनों के लिए समान रूप से फलदायी और महत्वपूर्ण है।
"माता मरुदेवीना नंद..." या "सिद्धाचल गिरि भेट्या रे..."। पूर्णता:
शांतिनाथ शांति के दाता, तुम बिन कौण अनाथ का त्राता।भव-भव के संकट सब काटो, निर्मल केवल ज्ञान रस बांटो।
यात्रा के बारे में भी जानना चाहेंगे?
"शांति जिनेश्वर सोहमा, अचिर सुत वंदो, विश्वसेन कुल नभोमणी, भवजन सुखकंदो।"
एकाग्र चित्त होकर ध्यान करें। जयवीयराय:
जैन धर्म में चैत्यवंदन एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसमें श्रद्धालु जैन मंदिरों की यात्रा करते हैं और वहाँ पूजा-अर्चना करते हैं। पलिताना में ५ चैत्यवंदन एक विशेष अनुष्ठान है, जिसमें श्रद्धालु पाँच विशेष जैन मंदिरों की यात्रा करते हैं।
3. तृतीय चैत्यवंदन: रायण पगला (Rayan Pagla Chaityavandan)
यह पालिताना का सबसे प्रमुख और पवित्र मंदिर है।
मैं आदिनाथ (ऋषभदेव), नेमिनाथ और पार्श्वनाथ जैसे सभी तीर्थंकरों को नमन करता हूँ। ये तीर्थंकर इस भरत क्षेत्र की शोभा हैं और मेरे सभी पाप समूहों (कर्मों के बंधनों) का नाश करने वाले हैं।
यहाँ पर एक विस्तृत और जानकारीपूर्ण ब्लॉग पोस्ट हिंदी में दी गई है। आप इसे अपने ब्लॉग या सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकते हैं।
कहानी शुरू होती है सुबह चार बजे। सर्दी हो या गर्मी, श्रद्धालु स्नान कर "नमस्कार महामंत्र" का जाप करते हुए पहुँचते हैं। यहाँ विशाल आदिनाथ भगवान का मंदिर है।
इस पावन गिरिराज पर रायन वृक्ष के नीचे विराजमान आदिनाथ प्रभु के चरण कमलों की मैं वंदना करता हूँ Tattva Gyan। माता मरुदेवा के लाल आदिनाथ भगवान का यह परम पावन तीर्थ है। जो जीव इन चरणों की भाव से पूजा करता है, वह परम आनंद (मोक्ष) को प्राप्त करता है।
परम गुरु देव की सेवा कीजे, जनम मरण दुःख दूर करीजे।सिद्ध अच्युत सुख संपति पावे, 'वीर' कहे भव पार लगावे।
आदिनाथ आनन्द के दाता, तुम जग के एकाकी त्राता।करुणा सिंधु कृपा अब कीजे, शिवपुर का सुख मोहे दीजे।